Post of 10th October 2022
एफ. आर. सिद्दीक़ी साहेब ने एक अंतरराष्ट्रीय अंग्रेजी अखबार मे लिखा है कि 2013 मे जब चीन के राष्ट्रपति शी जिंपिंग ने बेल्ट और रोड (BRI), सिल्क रोड मलेशिया के पूर्व प्रघानमंत्री महाथीर मोहम्मद के कहने पर शुरू किया तो चीन मे अरब देशो से राजनीतिक, आर्थीक तथा सैन्य सम्बंध बहुत तेज़ी से बढा (लिंक कौमेंट मे पढें).
सिद्दीक़ी साहेब लिखते हैं कि आज चीन की राजधानी बेजिंग मे धाराप्रवाह अरबी बोलने वाले लोग तेहरान और अंकरा से ज्यादा मिलते है।चीन मे हजारो नौकरी देने वाली वेबसाईट मे अरबी अनुवादक (ट्रांसलेटर) के पद का विज्ञापन नज़र आता है।चीन मे सैकडो अरबी स्कूल खुल गये हैं तथा बेजिंग विश्वविधालय मे अरबी विभाग खुल गया है।अरबी लोग चाईनिज औरतो से शादी कर चीन मे बस रहे हैं।अरब मे चाईनिज औरते बिजनेस करने जाती हैं तो शादी कर वहॉ बस जातीं हैं।
चीन ने बहुत सारे अरब मूल्क जैसे मोरक्को, लेबनान, मिस्र, सुडान, बहरीन, यूएई आदी मे कन्फ्यूशियस इंस्टीट्यूट खोला है जहॉ वह लोगो को चाईनिज़ ज़बान सिखाते हैं और उच्च शिक्षा के लिए चीन भी भेज रहे हैं।कन्फ्यूशियस चीन मे भारत के गौतम बुद्ध की तरह समकालीन दार्शनिक थे मगर चीन मे उन को कभी भगवान नही बनाया।शोध से पता चलता है कि कन्फ्यूशियज़म (Confucius thoughts) ने चीन के विभिन्न वर्ग को एक किया और आज चीन का जो नक्शा है वह कन्फ्यूशियस का ही योगदान है।यही कारण है कि चीन सरकार यूरोप के विश्वविधालयों मे MBA के चीनी छात्रों को तीन महीना के Cultural Studies मे Confucius को पढ़वाती है, हम ने चीनी छात्रो को पढाया है।
सिद्दीक़ी साहबे लिखते हैं कि ईवु (Yiwu) शहर मे अरब और सेंट्रल एशिया के वास्तुकला पर एक नई मस्जिद बनी है जहॉ 7,000 लोग जुमा की नेमाज़ पढते हैं।सरकार ने क़ुरान इंस्टीट्यूट खोला है।40 लडके कोरान के पढने की प्रतियोगिता मे भाग लेने सऊदी अरब गये हैं।
चीन की Xinhua न्यूज़ एजेन्सी अरब के सभी देशो मे है जिस का मुख्यालय मिस्र मे हैं। सऊदी अरब ने प्राथमिक तथा माध्यमिक स्कूल मे चीनी जबान पढ़ाने की शरूआत किया है।
#नोट: 16 अक्टूबर को शी जिंपिंग तीसरी बार चीन के राष्ट्रपति बने गें तो उमीद है कि चीन-अरब देशों के सम्बंध और मज़बूत हो गें क्योकि चीन 80% तेल और गैस अरब देशो से आयात करता है।आज के युग मे विश्वगुरू बनने के लिए अरब और उर्जा दो महत्वपूर्ण कारक (factor) है।
https://www.dailysabah.com/opinion/op-ed/soft-power-diplomacy-between-china-and-the-arab-world?fbclid=IwAR0QD93mq5G0uwVCZO0j_exTJXbcthUMClVd5k96Q9GQ7gL749MCpnca578
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Some comments on the Post
Mohammed Seemab Zaman सिद्दीक़ी साहेब का लेख शोध पर आधारित एक बहुत जानकारी भरा लेख है। इस मे हम को दो नई जानकारी मिली के ईवु शहर मे 7,000 लोग जुमा की नेमाज़ पढते हैं और ईरान की राजधानी तेहरान तथा तुर्की की राजधानी अंकरा से ज़्यादा बेजिंग मे धाराप्रवाह अरबी बोलने वाले लोग मिलते हैं।जिस मे अलजजिरा टीवी ने बहुत से लोगो का साक्षात्कार लिया है।
बाकी बात हम इस से ज्यादा जानते थे।हम चीन पर 2013 से पोस्ट लिख रहे हैं और BRI पर मेरा बहुत सारा पोस्ट है।यूगुर पर भी मेरा पोस्ट है।
- Mohammed Seemab Zaman Please, इस पोस्ट को खुब शेयर किजये।
- Ansar Ahmad, Mohammed Seemab Zaman सर, चाइना में अरबी बोलने वाले ऊगर मुस्लिम होने चाहिए या फिर उसके नागरिक अरबी में दिलचस्पी लेने लगे हैं.
Kamal Siddiqui वाह शानदार सर, दुनियां कितनी तेज़ी से आगे बढ़ रही है और हम लोग मस्ज़िद में मूर्ति ढूंढ रहे हैं।हम लोग शौचालय को उपलब्धि मान रहे हैं।जय #विश्वगुरु
- Mohammed Seemab Zaman, Kamal Siddiqui साहेब, देख रहे हैं, विश्वगुरू बनना के लिए कितना अपने को चीन बदल रहा है। जबकि हमारे यहॉ यह सब चीज़ पहले से थी केवल हम लोग मस्जिद मे मूर्ती ढूंडने का ड्रामा नही रचते तो आज हम लोग #विश्वगुरू होते। शौचालय तो बिहार के “शुल्भ शौचालय” से बिनदेशवरी पाठक ने उस वक्त शुरू किया था जब भारत मे किसी ने सोंचा नही था। मगर उस को ख़त्म कर नया ड्रामा अब शुरू किया गया।